मूल पुस्तक संख्या १ (आगे..)

१०२) हे सर्व ज्ञान के दिव्य दृष्टि के प्रेम दृष्टा सर्व दर्शन के भाव भक्ति के प्रेम विधाता सर्व जगत को  देने वाले संदेशात्मक भाव से पूर्ण हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत के कल्याण का कल्याणकारी वाणी का मूल उद्देश्य है।   १०३) हे अन्तरंग शक्ति अंतरंग योग दृष्टा आतंरिक भाव के…

मूल पुस्तक संख्या १

२ जून २०१६ १) हे महाशक्ति के महायोग दृष्टा तुम्हारी महिमा का गुणगान भूमण्डल में चहुँदिश छाए हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो शक्ति के संचालनकर्ता हो।  तुम्हारी यशकीर्ति का गुणगान सदा सदा करता रहूं   २) हे महायोग के महायोगेश्वर सत्य निष्ठ भावनाओं के भाव विधाता सत्य के आधार के परम स्वामी…

Sri Devaraha Hans Babaji Paravani Sutra

१)  हे परम  प्रिय परम आनंद के मूल स्त्रोत  जगजीवन के  परम आधार  परम  दृष्टि के परम शक्ति दायक श्री देवराहा बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों  को नित्य नित्य  वंदन शत शत प्रणाम  करता हूं २ ) हे परम आनंद के महा परम योगी परम शक्ति के महा शक्तिमान जगत के परम आधार श्री देवराहा…