मूल पुस्तक संख्या १

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२ जून २०१६

१) हे महाशक्ति के महायोग दृष्टा तुम्हारी महिमा का गुणगान भूमण्डल में चहुँदिश छाए हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो शक्ति के संचालनकर्ता हो।  तुम्हारी यशकीर्ति का गुणगान सदा सदा करता रहूं

 

२) हे महायोग के महायोगेश्वर सत्य निष्ठ भावनाओं के भाव विधाता सत्य के आधार के परम स्वामी श्री देवरहा हंस बाबा जी असीम दया की  परम भावना को जागृत करो। तुम्हारे श्री चरण कमलकों का दर्शन अभिलाषी रहूं. हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही जीवन परम आश्रय दाता हो  तुम्हारी महिमा अनंत है अपार शक्ति का जिनका वह श्री देवरहा हंस बाबा जी मेरे जीवन के प्राणाधार हैं

 

३) हे अन्यत्र ज्ञान की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम अंतर्योग के तत्ववेत्ता हो सैम दृष्टि के समदर्शित अवस्था को पूर्ण प्राप्त किये हुए हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अनन्य प्रीति सदा सदा बढ़ती रहे

 

४) हे श्री परम ज्ञान के परम दृष्टा, परम योग के अंतर ज्ञानी, दिव्य दृष्टि के आंतरिक दृष्टा, तुम्हारे ही चरणकमल कि महिमा का यशगान सर्व भूमंडल में फैलता रहे| हे श्री देवराहा हंस बाबाजी शरणागत के प्राण रक्षक तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

५) हे ज्ञान ध्यान के महा दृष्टा, भाव भक्ति के परम दयालु, सत्य प्रेम कि पूर्ण प्रेमनिष्ठ भावना को जगाने वाले सत्य प्रेम के स्वरुप हे श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे चरणकमलों के अनुराग में परम अनुरागी हो जाऊं कृपा करो दया करो हे कृपानिधान कृपा करो

 

६) अंतरंग भावना के आंतरिक योग के दृष्टि के पूर्ण दृष्टा श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे चरणाश्रित भाव का दिव्य आनंद हर क्षण हर पल प्राप्त होता रहे

 

७) हे आनंद योग के परम आनंदनीय अवस्था को प्राप्त कराने वाले परम आनंद के स्वरुप महाशक्ति के तेजस्वी हे श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे नाम की महिमा का गुणगान चहुँ दिशा में गुंजन हो

 

८) हे परम योग के परम दृष्टा, परम ज्ञान के महा ज्ञानी, प्रेम भाव के भक्तिदाता हे श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारी महिमा का गुणगान चरणों कि शक्ति का पूर्ण प्रभाव शरणागत के शरणागत भाव में पूर्ण दया करो दया करो दया करो

 

९) हे ध्यान योग के परम ध्यानेश्वर, चरणानन्द के परम चरणेश्वर, भूमंडल के संचालनकर्ता, सर्व भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवराहा हंस बाबा जी तुम्हारे  चरणकमल कि महिमा नित्य निरंतर गाता रहूँ

 

१०) हे प्राणदाता, प्रेम बुद्धि के सर्व विधाता, ज्ञान ध्यान के आनंद दाता, सर्वयोग के महायोगी श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे श्रीचरणकमलों का यशगान जिह्वा का एकमात्र गुणगान हो

 

११) हे सर्व भूमंडल के आधिपत्य को प्राप्त किये हुए श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे श्री चरणकमलों की आंतरिक शक्ति का पूर्ण योग सर्व प्रेम अवस्था का पूर्ण दर्शन है| अतः तुम्हारे श्रीचरण कमलों की हे श्री देवराहा हंस बाबाजी नित्य निरंतर गुणगान जीवन का परम आधार हो

 

१२) हे परम योग के अंतरज्ञानी, परम भाव के अंतरद्रष्टा, परम त्याग के महात्यागी श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे चरणकमलों का गुणगान हो जीह्वा का परम ज्ञान यही तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय अभिलाषी हूँ

 

१३) हे सर्व दर्शन पूर्ण दर्शन प्रेम दर्शन की आंतरिक दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवराहा हंस बाबाजी महाराज तुम्हारे ही चरणकमलों का चरणीय अनुरागी हो जाऊं कृपा करो कृपा करो कृपा करो

 

१४) हे आंतरिक भावना की पूर्ण भक्ति अवस्था को प्राप्त करानेवाले श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे चरणकमलों का अनन्य दर्शन जीवन के त्रयताप को नष्ट करने वाला है

 

१५) हे परम ध्यान के परम तपस्वी परम योग के अंतरंग दृष्टा, भावभक्ति के अंतर ज्ञानी, आंतरिक योग के हे समदृष्टा, समत्व भाव के सम्पूर्ण दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवराहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणकमलों का चरणीय आनंद चरणीय वंदन हर क्षण हर पल वन्दनीय हो

 

१६) हे आनंद भाव के परम योग दृष्टा, परम शक्ति के आंतरिक योग शक्तिदाता श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे श्री चरणकमलों का चरण अनुरागी पूर्ण भाव से अनन्य भक्ति से पूर्ण समर्पित भाव के समर्पित योग से चरण शरण में पूर्ण समर्पण हो| जय जय हो तुम्हारी जय जय हो तुम्हारी जय जय हो तुम्हारी जय जय हो

 

१७) हे सर्वांग भाव की दृष्टि के आंतरिक दृष्टा, सर्व भाव की दिव्य अनुभूति के परम भाव के आंतरिक अवस्था को प्राप्त कराने वाले भावानन्द के परम स्वरुप हे श्री देवराहा हंस बाबाजी तुम्हारे श्री चरणकमलों में चरणीय आनंद चरणीय वंदन सदा सदा ही वन्दनीय हो यही है अनन्य भाव की पूर्ण अभिलाषा तुम्हारे श्री चरणों में

 

१८ ) हे आतंरिक शक्ति के पूर्ण शाक्तिदाता भवमण्डल के पूर्ण  आधार ध्यान मार्ग के अन्तर्ध्यानि परम तपस्या के परम तपस्वी चरण शरण के शरणागत रक्षक श्री देवरहा हंस बाबा जी बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा अपरंपार है तुम्हारे चरणों की भक्ति का यशगान अनंत है अतः शरणागत की रक्षा करने वाले शरणगत रक्षक रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

१९) हे परम पावन परम पुनीत चरण कमल के चरणाश्रित भाव को जगाने वाले भावानंद के प्रेम स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी जीवन का एकमात्र आधार तुम्हारे ही चरणों का आश्रय है।  हे शरणागत वत्सल शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

२०) हे सर्व भूमण्डल के अधिपति समस्त भाव के आनंद दृष्टा सर्व शक्ति के महावतारी सर्व दर्शन के महादर्शी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा शक्ति का महानंद महाभाव की पूर्ण अवस्था की प्राप्ति सर्व विदित है

 

२१) हे ध्यान ज्ञान के परम पुंज परम ज्ञान के महा अवतारी भक्ति दर्शन के महा भाव को देने वाले हे महा भावेश्वर श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा अनंत है अपरंपार है तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय आनंद अपार है दया करो हे करुणानिधान  कृपा करो करुणानिधान प्रेमी भक्त गण तेरे चरण शरण के आश्रित हैं जय हो जय हो तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

२२) हे सर्व ज्ञान के ज्ञानेश्वर पूर्ण ध्यान के ध्यानेश्वर प्रेमाभक्ति के प्रेमेश्वर पूर्ण भाव भक्ति के महा अवतारी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों में  चरणीय वंदन चरणीय स्तुति चरणीय आराधना चरणकमल का चरणीय आनंद का पूर्ण पिपासी हूँ पिपासी की प्यास तृप्त करो तृप्त करो तृप्त करो. प्राणरक्षक तुम्ही प्राणरक्षक हो। जय हो जय हो. तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

२३) हे अंतरंग योग शक्ति के महा ध्यान योगी योग दर्शन के परम अवतारी सर्व आनंद दिव्य आनंद पूर्ण आनंद भाव आनंद प्रेमानंद के प्रेमवतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही महिमा का यशगान सदा सदा करता रहूं

 

२४) हे अंतरंग योग दृष्टा अंतरंग योग शक्ति के महा शक्तिमान प्रेम भाव भक्ति  की अविरल धारा है जिनकी वह प्रेमानंद के स्वरुप परम अवतारी श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण कमलों के चरणाश्रित आश्रय के आश्रय दाता चरण शरण में पूर्ण आश्रय प्रदान करो प्रदान करो हे कृपा निधान हे भक्त वत्सल तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

२५) हे सर्व योग सर्व दृष्टि प्रेम दर्शन भाव भक्ति के प्रेमानंद स्वरुप के प्रेम स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों की चरणीय आराधना सतत भाव से करता रहूं।  हे श्री देवरहा हंस बाबा जी परम कृपा का परम निधान परम दृष्टि के परम दयालु तुम्हारी सदा सदा ही जय हो जय हो जय हो

 

२६) हे ज्ञान ध्यान भाव भक्ति प्रेमदर्शन सर्व योग के प्रेम दृष्टा सर्व ध्यान के आनंद स्वरुप तुम्हारे श्री चरणकमलों का चरणाश्रित भाव का परम आश्रय सदा सदा ही प्राप्त होता रहे. हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणकमल में चरणीय वंदन सदा सदा ही वंदनीय हो।  कृपा करो दीनबंधु रक्षा करो शरणागत रक्षक तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

२७) सर्व योग दर्शन परम ध्यान ध्याता पूर्ण भाव दृष्टि के सर्व भाव भावानंद स्वरुप परम ज्ञान दिव्य दर्शन पूर्ण ध्यान दृष्टा सर्वज्ञान योग की परम शक्ति श्री देवरहा हंस बाबा जी दया करो दया करो

 

२८) सत्य नित्य योग की पूर्ण अवस्था के सर्वोच्चय भावनाओं के भाव दृष्टा अंतरंग शक्ति के ज्ञान के सर्व ज्ञाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का पूर्ण चरणीय आनंद का चरणानुरागी रहूं कृपा करो दया करो कृपा करो दया करो हे परम कृपा निधान कृपा करो

 

२९) सत्य दर्शन के पूर्ण सत्य निष्ठ परम भक्ति के परम ध्यानी ज्ञान ध्यान योग के परम निष्ठवान रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो हे श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की रक्षा करो

 

३०) हे पूर्ण योग के परम योगेश्वर ध्यान योग के परम दिव्य दृष्टा सर्व शक्ति के पूर्ण शाक्तिदाता परम ध्यान के सर्व अंतर्ज्ञानि सर्व शक्ति के पूर्णयोगी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का सत्यनिष्ठ भाव से पूर्ण समर्पित हूँ दया करो दया करो हे दीनबंधु दया करो

 

३१) हे सर्वानंद के परम स्वरुप दिव्य ज्योति के सत्यधार  नित्य सत्य के शक्तिवान पूर्ण भाव के सर्वभावानन्द पूर्ण ध्यान के परम ध्यानी सत्य प्रेम के पूर्ण प्रेमी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो एकमात्र हो प्राणदाता तुम्हारी शरण हूँ प्राण की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

३२) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के देदीप्यमान सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के महादृष्टा सर्व शक्ति के महा पूर्ण भावेश्वर तुम्हारी शरण में हूँ हे श्री देवरहा हंस बाबा जी ीक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

३३) सर्व ज्ञान के परम दिव्य ज्योति के ज्योतिमान ध्यान ज्ञान पूर्ण योग की योग शक्ति के अंतरंग योग दृष्टा पूर्ण भाव की दिव्य आनंद के सर्वत्र योग दृष्टा समस्थिति की व्यक्तावस्था की पूर्ण पूर्ण स्थिति हे श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त करूँ प्राप्त करूँ प्राप्त करूँ। कृपा करो कृपा करो

 

३४) हे सर्वत्र ज्ञान की दिव्य दृष्टि के सर्वत्र निष्ठा के पूर्ण निष्ठावान  पूर्ण भाव की सर्वशक्ति के अंतरंग स्वामी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों में में पूर्ण समर्पित भाव समर्पित है।

 

३५) हे ज्ञान ध्यान के परम अवस्था को प्राप्त किये हुए श्री देवरहा हंस बाबा जी परम तेज के पूर्ण तेजस्वी परम भाव के परम दयालु नित्य निरंतर चरणकमलों में हे श्री देवरहा हंस बाबा जी अनन्य भक्ति की पूर्ण अनन्यता सतत प्राप्त करता रहूं

 

३६) हे सत्य ज्ञान के पूर्ण ज्ञानवान सतत भाव के परम भावी दृष्टा सत्य नाम के पूर्ण परम स्वामी सर्वत्र योग का सर्व दर्शन के पूर्ण दर्शक सत्य के आधार से सत्यनिष्ठ योग का सर्वदर्शन  का पूर्ण भाव नित्य सत्य योग के पूर्ण भाव में हे श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त करता रहूं

 

३७) हे परम तेज की पूर्ण तेजसवावस्था को प्राप्त किये हुए परम ध्यान के पूर्ण ध्यानी सत्य ज्ञान की पूर्ण दृष्टि के सर्व दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी शरण में हूँ रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो हे परम कृपानिधान रक्षा करो

 

३८)  हे सर्व ध्यान के परम दिव्य शक्ति के सर्वनिष्ठ योग के समहित भावनाओं के भावित दृष्टा सर्व दर्शन के सर्वहित का आतंरिक दर्शन आनंद नित्य नित्य सत्य सत्य हे श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त करूँ

 

२ जून २०१६

 

३९) हे सर्वत्र ज्ञान पूर्ण दिव्य दृष्टि के सर्वत्र भाव के पूर्ण देदीप्यमान सर्व संकट के हरण करने वाले हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का अभिवंदन सतत सतत नित्य निरंतर करता रहूं

 

४०)  हे सर्व ज्ञान के पूर्ण धुरंधर प्रेम भाव के सर्व योगी परम शक्ति के पूर्ण शक्तेश्वर ध्यान दृष्टि के महादृष्टा योग शक्ति के परम योगी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों के पूर्ण परम आश्रय सदा सदा प्राप्त हो

 

४१)  हे पूर्ण भाव के परम स्वरुप नित्य ज्ञान के पूर्ण ज्ञाता सत्य भाव के पूर्ण भावनाओं को जागृत करने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अहर्निश भाव भक्ति की पूर्ण पिपासा की पिपासिय स्थिति बानी रहे हे कृपानिधान कृपा करो रक्षा करो कृपा करो रक्षा करो

 

४२) हे पूर्ण भाव के परम भावानंद स्वरुप सर्व शक्ति के दिव्य दृष्टिवान सत्य के पूर्ण भाव के आतंरिक दृष्टा सर्व निष्ठां भाव के परम स्वरुप स्वानंद के परम आनंदी ज्ञान भक्ति के परम दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों के  आश्रित भाव का आश्रय प्राप्त करूँ हे कृपानिधान ध्यान योग परम योगी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी चरणाश्रित भाव की परम दया करो पूर्ण पूर्ण कृपा करो पूर्ण पूर्ण कृपा करो कृपानिधान

 

४३) हे सत्य नित्य भावना के आतंरिक ज्ञाता परम दिव्य शक्ति के आनंद दाता सर्व निष्ठ योग की परम भावना को जगाने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो अनन्य भक्ति की अनन्यता के महा अनन्य सागर हो

 

४४) सर्वात्म ज्ञान दिव्य दृष्टि पप्रेमांदित अवस्था पूर्ण अवस्था सर्व दृष्टि पूर्ण अवस्था के सर्व योग की भावनाओं को जगाने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों की अनन्य भक्ति का पूर्ण प्रेम प्राप्त करने का एक ही आधार चरणाश्रित भाव का हो

४५) सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के पूर्ण योग दृष्टा योग की अन्तरंग शक्ति के आतंरिक दृष्टि के दृष्टा शरणागत की दिव्य प्रेम की आतंरिक भावनाओं को जागृत करें। हे सर्व ज्ञान के आतंरिक योग दृष्टा परम शक्ति के परम योग दर्शित दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों के चरणीय अभिलाषी की इच्छा  पूर्ण हो

 

४६) हे परम दीनबंधु दयानिधान कृपा दयालु परम भाव के भावित दृष्टा तुम्हारी महिमा का यशगान सदा सदा भूमण्डल पर गुंजायमान होता रहे. हे श्री देवरहा हंस बाबा जी यही चरणों का आश्रय आश्रित को प्रदान करो

 

४७) हे सर्वत्र ज्ञान दिव्य आनंद परम अवस्था पूर्ण दृष्टि सर्व भाव के दिव्य दृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों की वंदना सर्व भाव में सतत वन्दित हो

 

४८) हे सर्व दर्शन के परम ज्ञाता आनंद ज्ञान की परम दृष्टि को प्रदान करने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणकमलों के दर्शन का लाभ आतंरिक भाव और भक्ति का प्रेम है।  हे सर्व दर्शन के परम दृष्टा परम ध्यान के पूर्ण योगी सर्व दर्शन के महा शक्ति के पूर्ण दाता श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी कृपा नित्य निरन्तर पाता रहूं

 

४९) हे सर्व आनंद के दिव्य ज्योतिर्मय स्वरुप सर्व दर्शन के परम अवतार हे शर देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी सदा सदा जय जयकार हो

 

५०) अंतरंग दर्शन अंतरंग दृष्टि के आतंरिक ध्यानी परम शक्ति के परम योग दृष्टा परम भाव की परम स्थिति को प्राप्त कराने वाले परम प्रताप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों का चरणीय गुणगान नित्य निरंतर करता रहूं

 

५१) हे प्रेम के प्रेमांदित  योग की पूर्ण आनंदित अवस्था को प्राप्त कराने वाले भाव भक्ति प्रेम के प्रेमांदित भाव के सर्व दृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अभिवन्दनीय स्तुति नित्य निरंतर अभिवन्दित हो

 

५२) सर्व दर्शन ज्ञान दर्शन प्रेम दर्शन भाव दर्शन के मूर्तिमान सर्वनिष्ठ भावनाओं के अंतरंग स्वरुप प्रेमा भक्ति के प्रेमानंद स्वरुप ध्यान ज्ञान के परम अवतारी प्रेमानंद के भक्ति दर्शन के महा भावानंद  स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय वंदन नित्य निरंतर वन्दित हो। हे सर्व भाव के पूर्ण भावेश्वर सत्य शक्ति के सत्येश्वर पूर्ण आनंद के महा आनंदेश्वर श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अनन्य भक्ति भक्ति दर्शन का ही मूल दर्शन प्राप्त हो

 

५३)हे सर्व योग का परम शक्तिमान परम आनंद की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले अहर्निश भाव की पूर्ण परम अवस्था के महा स्वरुप तुम्हारे चरण कमलों की नित्य निरंतर आनंद के आनंदनीय श्रोत की धरा आतंरिक उमंग में सदा सदा ही लीन रहूं

 

५४) हे अंतरंग ज्योति के परम साक्षात्कार भाव भक्ति दर्शन  के परम आनंद के स्वरुप परम योग की परम शक्ति का पूर्ण संचालित योग के अंतरंग दृष्टा प्रेमानंद अवस्था के परम योगी ध्यान की आतंरिक अवस्था के अंतरंग दृष्टा सर्व ज्ञान की दिव्य अनुभूति का पूर्ण योग हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का पूर्ण योग का महादर्शन है

 

५५) हे अंतर योग की दृष्टि के परम दृष्टा अंतर-भाव की दृष्टि के आतंरिक योग के परम योगी अंतरंग भावना के दिव्य श्रोत प्रेम के आतंरिक योग के समदृष्टा हे समवेत्ता ब्रह्मवेत्ता दिव्य चेतना का आतंरिक भाव को चैतन्यमय अवस्था को प्राप्त कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी परम धन्य है वह जीवन जो तुम्हारे चरणों के चरणाश्रित भाव की शरणागति को प्राप्त कर ले

 

५६) हे अंतरंग योग दृष्टि के परम योगी अंतरंग शक्ति के पूर्ण ज्ञानावतार परम दिव्य शक्ति के संचालनकर्ता दिव्य भाव दिव्य प्रेम की पूर्ण अनुभूति के आतंरिक ज्ञाता हे श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अनन्य भक्ति का रसपान जीवन का परम आश्रय हो

 

५७) हे अंतरंग योगी परम ज्ञान के पूर्ण दृष्टा सर्व योग के परम आधार सर्व दर्शन के प्रेम भाव के पूर्ण प्रेमभाव की विभोरावस्था को प्राप्त कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों में चरणाश्रित भाव की पूर्ण शरणागति प्राप्त करूँ

 

५८) हे प्रेमानंद के पप्रेमांदित  भाव के परम स्वरुप परम ध्यान ज्ञान के महाज्ञानी प्रेम की आतंरिक अवस्था के आतंरिक योग के समदृष्टा तत्वदर्शन के तत्वदर्शी हे तत्वज्ञान के महतत्वज्ञानी महाशक्ति के महास्वरूप रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो

 

५९) हे अंतरंग योग दृष्टा भक्ति की अंतरंग अवस्था के आतंरिक योग की महाभाव की पूर्ण अवस्था को प्राप्त कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण शरण का शरणीय आनंद का सतत पूर्ण अभिलाषी हूँ

 

६०) हे सर्व शक्ति के परम स्वरुप दिब्य दृष्टि के आनंद दृष्टा सर्व ज्ञान के हे परम योगी परम भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का अमित प्रताप चरण शरण की नित्य सत्य वंदना का वन्दित भाव तुम्हारे चरण कमलों में पूर्ण वन्दित है

 

६१) हे भक्ति मार्ग के परम प्रेमानंद स्वरुप ज्ञान दर्शन के परम ज्ञान सर्व प्रेमभावनाओं के भावित दर्शन को प्राप्त कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी भाव भक्ति प्रेम की प्रेमांदित अवस्था को पूर्ण प्राप्त करूँ।  यही चरण शरण में हार्दिक अभिवंदन है

 

६२) हे भक्ति दर्शन की प्रेमावस्था के प्रेमदर्शन के परम दिव्या प्रेमावस्था को प्राप्त किये हुए प्रेम योगी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय योग का दर्शन भक्ति दर्शन का ही मूल दर्शन है

 

६३) हे योग दर्शन के परम दृष्टा योग दर्शन के परम तपस्वी ज्ञान ध्यान के महावतारी चरण दर्शन के संकटहारी प्रेम भक्ति के प्रेमावतारी दर्शन भाव में परम उदारचित के स्वामी हे श्री देवरहा हंस बाबाजी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरण वंदन जीवन का आधार है. जय जय कार हो तुम्हारे नाम महिमा यशगान का. कीर्ति का विस्तारपूर्ण भूमण्डल में हो

 

६४) हे सर्व शक्ति के परम ध्यानावस्था के परम ध्यानी पूर्ण दृष्टि के सर्वत्र भाव के पूर्ण अवतार तुम्हारे श्री चरणकमलों का सतत आश्रय हे श्री देवरहा हंस बाबा जी नित्य प्राप्त करूँ

 

६५) हे सत्य ज्योति के परम ज्योतेश्वर ध्यान ज्ञान की परम दृष्टि के पूर्ण ध्यान ज्ञान की परम दृष्टि के पूर्ण ज्ञाता सर्वानंद के पूर्ण अवतारी सत्य निष्ठ भाव को प्राप्त कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी रक्षा करो तुम्हारी शरण में हूँ रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो।  

 

६६) हे परम शक्ति के पूर्ण शक्तिवान दया ज्ञान के परम पुंज सत्य निष्ठां भाव के परम निष्ठित निष्ठावान सर्व भाव की पूर्ण अवस्था को प्राप्त कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी सदा सदा शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो

 

६७) हे पूर्ण भाव के आतंरिक दृष्टा सर्व शक्ति के परम शक्तिशाली सर्व दृष्टि के परम दृष्टिवान सत्य की सत्यता के परम योगी पूर्ण भाव के परम ज्ञानी सर्व योग की योग अवस्था को प्राप्त कराने  वाले हे दीनबंधु श्री देवरहा हंस बाबा जी रक्षा करो रक्षा करो हे कृपानिधान रक्षा करो रक्षा करो

 

६८) हे सर्वत्र ज्ञान के पूर्ण ज्ञानी सर्वभावना के भावित भाव को जागृत करने वाले सत्य ज्ञान के परम दृष्टा रक्षा करो रक्षा करो हे श्री देवरहा हंस बाबा जी सदा सदा रक्षा करो

 

६९)   हे सर्वत्र भावना के पूर्ण भावना को जागृत करने वाले परम आनंद के स्वरुप परम ध्यानी सत्य ज्ञान के पूर्ण योग ध्यान ज्ञान के परम दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही सर्व भाव के पूर्ण दाता हो दया करो दया करो दया करो

 

७०) हे सर्वत्र ज्ञान की पूर्ण दृष्टि को प्रदान करने वाले परम दयालु सत्य ज्ञान की दिव्य दृष्टि के अंतर्ज्ञा सत्य निष्ठ भाव के पूर्ण सत्यानंद स्वरुप पूर्ण भाव के परम निष्ठां योगी हे श्री देवरहा हंस बाबा सदा सदा रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो

 

७१) हे सर्व योग दर्शन के परम दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्व ज्ञान की पूर्ण दृष्टि के दृष्टा सर्वत्र भाव की दिव्य अनुभूति के अनुभवी सत्य ज्ञान के पूर्ण आनंद को हे श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त करूँ प्राप्त करूँ प्राप्त करूँ

 

७२) सर्वत्र ज्ञान के सर्वानंद के परम स्वरुप ज्ञान दृष्टि के परम दृष्टा सर्व शक्ति के परम शक्तिदाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों में पूर्ण शरणागत हूँ रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

७३) सत्य ज्ञान के परम ज्ञानी पूर्ण ध्यान की परम शक्ति को प्रदान करो हे श्री देवरहा हंस बाबा जी पूर्ण भाव की सर्व दृष्टि को प्रदान करो शत शत प्रणाम है

 

७४) सर्व भाव की दिव्य दृष्टि के आनंद दाता सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के पूर्ण परम ज्ञानी सर्व शक्ति के पूर्ण आनंद का सत्य भाव पूर्ण प्राप्त करूँ हे श्री देवरहा हंस बाबा जी कृपा करो कृपा करो हे कृपानिधान कृपा करो

 

७५) सर्व ध्यान के परम निष्ठ भाव के आतंरिक दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सत्य प्रेम के अंतर्भाव का आश्रय करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी शरण में हूँ तुम्हारी शरण में हुहँ. शरणागत की रक्षा करो

 

७६) हे परम योग के परम योगी ध्यान ज्ञान के सर्वनिष्ठ भावना के अंतर्भाव आतंरिक योग के परम दृष्टा सर्व  दृष्टि की परम भक्ति को प्राप्त करूँ प्राप्त करूँ. हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों का पूर्ण आश्रय प्राप्त करने को आश्रित हैं हे आश्रय दाता शरणागत को पूर्ण आश्रय प्रदान करो

 

७७) हे सर्वत्र ज्ञान की पूर्ण दृष्टि को प्रदान करने वाले अनंत शक्ति  के पूर्ण शक्तिमान हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा तुम्हारे गुढ़ों का गुणगान चाहर दिशा में प्रख्यात है

 

७८) हे सर्व आनंद के परम स्वरुप ज्ञान योग के परम दृष्टा ज्ञान को प्रदान करने वाले परम ज्ञानी पूर्ण पूर्ण चरणों के आश्रय का हे श्री देवरहा हंस बाबा जी आश्रय प्राप्त करूँ

 

७९) हे सर्वत्र ज्ञान  के पूर्ण ज्ञाता सर्वानंद की दिव्यानुभूति के आतंरिक पूर्ण अवस्था को प्राप्त किये हुए प्रेमानंद के परम स्वरुप तुम्हारे चरणों के गुणगान हे श्री देवरहा हंस बाबा जी जिहवा पर नित्य निरन्तर करता रहूं

 

८०) हे सर्वत्र ज्ञान के परम ज्ञानी सत्य निष्ठ भावना के परम दृष्टा सत्य प्रेम की पूर्ण अवस्था के परम स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों का दिव्यानंद सदा सदा प्राप्त करूँ दया करो कृपानिधान दया करो दया करो दया करो।

 

८१) सत्य ज्ञान के पूर्ण अवतारी सत्य निष्ठ भावना के पूर्ण सत्यवान पूर्ण सत्य की परम दिव्य भावना को जागृत करने वाले तुम्हारे चरण कमलों की हे श्री देवरहा हंस बाबा जी बारम्बार वंदना करता रहूं दया करो कृपानिधान हे भक्तवत्सल कृपा करो कृपा करो

 

८२)  सर्व शक्ति के अंतरंग योगी सर्व ज्ञान के परम तपस्वी योग दर्शन के पूर्ण दृष्टा सर्व शक्ति के परम दिव्य दृष्टि के दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणकमलों के प्रेम का पिपासु हूँ कृपा करो कृपा करो शरणागत की रक्षा करो

 

८३) हे सर्वानंद के दिव्य स्वरुप सर्व शक्ति के परम दिव्य शक्ति के पूर्ण दृष्टा योग के आतंरिक भावना को जागृत करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्ही एकमात्र रक्षक हो रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो

८४) सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्वत्र भावना को जागृत करने वाले परम तेजस्वी ज्ञान ध्यान की दृष्टि को पूर्ण पूर्ण प्रदान करो हे श्री देवरहा हंस बाबा जी  तो जीवन के परम आश्रय हो रक्षा करो दया करो कृपा करो शरणागत की रक्षा करो शरणागत रक्षक तुम्हारी जय हो जय हो जय हो

 

८५) सर्वानंद के दिव्य शक्ति के आतंरिक भावना को जागृत करने वाले सर्वानंद के परम स्वरुप पूर्ण भाव भक्ति के आश्रय दाता  पूर्ण चरणों के आश्रय दाता चरणकमलों का आश्रय प्रदान करो

 

८६) हे परम योग के परम पावन परम भक्ति के अनन्य भक्ति दाता सर्वानंद की दिव्यानुभूति के परम अनुभवी सत्यानंद के परम स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी  शरण में हूँ रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

८७) हे परम ध्यान महा ध्यानी योग शक्ति के पूर्ण शक्तिवान  चरण कमलों के अहर्निश भाव की अनन्य भक्ति का पूर्ण प्रार्थी हूँ। हे प्राणदाता रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो। हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की वंदना क्षण वंदनीय हो। हे भक्तवत्सल  तुम्हारे चरणों में पूर्ण समर्पित हैं

 

८८) हे परम पावन परम आनंद के  परम स्वरुप सर्वदर्शन के परम दर्शन दिव्य शक्ति के परम  ज्योतेश्वर तुम्हारे चरणों के दिव्यानंद के पूर्ण भाव को हे श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त करूँ, दया करो कृपानिधान हे सत्य योग के परम दृष्टा दया करो

 

८९)  प्रेम भाव के परम योग दृष्टा पूर्ण ज्ञान के परम भाव के दृष्टा  दिव्य स्वरुप सर्व शक्ति के प्रदाता योगानंद के आनंद स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी  हूँ रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

९०) सर्व भावना के दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले परम भाव के परम दृष्टि को प्रदान करने वाले  हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही जीवन के पूर्ण आश्रय दाता हो रक्षा करो रक्षा करो हे कृपा कृपालु रक्षा करो

 

९१ सर्व ज्ञान के दिव्य दर्शन के सर्व दृष्टा सर्व शक्ति के परम दिव्य स्वरुप सर्व शक्ति के पूर्ण शक्ति दाता सर्व दर्शन के पूर्ण दर्शित दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरणों के चरणानंद के पूर्ण अभिलाषी हूँ दया करो कृपा करो हे दीनबंधु दया करो तुम्हारे चरणों में शत शत प्रणाम है

 

९२) हे परम भाव के भावुक दाता  ज्ञान प्रेम के पूर्ण ज्ञाता सर्व शक्ति के अंतरंग शक्ति दाता पूर्ण शक्ति के पूर्णानंद को प्राप्त कराने वाले कृपानिधान हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों में नित्य नित्य सतत प्रणाम है

 

९३) हे   पूर्ण भाव के आतंरिक दृष्टा सर्व शक्ति के परम शक्ति दाता पूर्ण भाव के सर्वत्र  दाता ध्यान दर्शन के परम दर्शी पूर्ण प्रेम के चरण शरण के परम आनंद के पूर्ण स्वरुप हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों की चरणाश्रित कृपा नित्य निरंतर प्राप्त करता रहूं

 

९४) हे भावानंद  प्रेमानंद पूर्णानंद सर्वानंद नित्यानंद सत्य ज्ञान के परम  परम शक्ति के पूर्ण विधाता सत्य दर्शित दृष्टि को प्रदान करने वाले  तत्त्व दर्शी तुम्हारे चरण कमलों का बारम्बार अभिवंदन करता हूँ। चरण कमलों में पूर्ण समर्पित हूँ दयालु कृपालु करुणा सागर  हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का पर्मानुरागि हूँ दया करो रक्षा करो भक्तशिरोमणि श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही जीवन के परमाधार हो  कृपा करो

 

९५) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा श्री देवरहा  हंस बाबा जी तेरी सदा सदा जय हो जय हो जय हो

 

९६) हे अंतरंग योग की दृष्टि को  प्रदान करने वाले अंतरंग शक्ति के पूर्ण शक्तिमान श्री देवरहा हंस बाबा जी तेरे चरण कमलों में बारम्बार नतमस्तक होता रहूं

९७) हे अंतरंग  शक्ति के अंतरंग योग के पूर्ण दृष्टा सर्व शक्ति के पूर्ण प्रविष्ट अवस्था को प्राप्त  किये हुए हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों में बारम्बार वंदन करता हूँ वन्दन करता हूँ

 

९८) हे परम शक्ति के परम  योग के पूर्ण शक्ति प्रदान करने वाले शक्तिमयी अवस्था में स्थित हुए श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण कमलों का बार बार वंदन करता हूँ बार बार वंदन  करता हूँ।

 

९९)  हे सर्व ज्ञान के परम ज्ञानी परम ध्यानी परम शक्ति के अन्तरंग शक्तिमान श्री देवरहा हंस  बाबा जी तेरे चरणकमलों का अभिवंदन करता हूँ अभिवंदन करता हूँ

 

१००) हे सर्व आनंद के पूर्ण स्वरुप ध्यान दृष्टि के महा दृष्टा योग शक्ति के परम शक्ति दायक श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणकमलों का पूर्ण परम आश्रय  प्रदान करो दया करो परम दयालु दया करो दया करो.

 

१) सर्व ज्ञान की पूर्ण दृष्टि के पूर्ण पूर्ण दृष्टा अन्तरंग योग दृष्टि के पूर्ण अनुभवी अंतरंग शक्ति का दिव्य आतंरिक योग का दर्शन है जिनका वह श्री देवरहा हंस बाबा जी आधार हो

 

२) हे अंतरंग अवस्था के दिव्य ज्ञान की परम शक्ति के महायोग के महायोगी तुम्हारे ही परम शक्ति के महायोग के महायोगी रूप तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणीय वंदन नित्य निरंतर चरण शरण में वंदनीय हो

 

३) हे परम भाव के आतंरिक दृष्टा ध्यान योग के महा ध्यानी चरण शरण के अंतर्यामी ज्ञानानंद के महा अवतारी श्री  तुम्हारे चरण शरण में जीवन का परम आश्रय प्राप्त हो

 

४) हे ज्ञान योग के महा ज्ञानेश्वर चरण भक्ति के पूर्ण चरणेश्वर परम कृपा परम दृष्टि परम दया हे  देवरहा हंस बाबा जी सदा सदा ही प्राप्त करता रहूं तुम्हारे चरण शरण की बलिहारी है

 

५) अंतरंग योग की दृष्टि के हे परम दृष्टा अंतरंग योग शक्ति के महायोग दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे ही चरणों में नित्य नित्य शत शत प्रणाम करता रहूं

 

६) परम भाव के दिव्य परमेश्वर प्रेम भाव के पूर्ण विधाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणों का यशगान सर्व भूमण्डल जो फैले वही विश्व में मंगल सन्देश होगा

 

७) हे दिव्य शक्ति के महा स्वरुप शरणागत के चरण शरण को चरण शरण का  पूर्ण आश्रय देने वाले भक्ति दर्शन के प्रेमावतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

८) हे आतंरिक भाव के दिव्य आनंद के दाता सर्व जगत के पालन करता अन्तरंग शक्ति के योग का सञ्चालन है जिसका वह श्री  देवरहा हंस बाबा जी मेरे जीवन के परम आश्रय कृपा करो कृपा निधान भक्त वत्सल शरणागत रक्षक दया करो दया करो

 

९) हे परम पावन परम मंगल कल्याण के आतंरिक  प्रेरणा को देने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय वंदन सतत सतत स्वीकार हो

 

१०) हे सर्व ज्ञान की सर्व दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्व आनंद की दिव्य दृष्टि के प्रेमानंद स्वरुप सर्व दर्शन की पूर्ण दृष्टि के महा दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का यशगान सर्व भूमण्डल में फैलेगा तभी संपूर्ण विश्व के मांगलिक सन्देश का भाव जागृत होगा

 

११)  हे परम योग के महा योगस्वी योग ध्यान के महा ध्यानी प्रेम भक्ति के महा प्रेमानंद स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों के आश्रय से पूर्ण आश्रित रहूं

 

१२) हे ब्रह्मतत्व के महा तत्ववेत्ता दृव्य दर्शन के तत्त्व दर्शित तत्त्व ज्ञान के महा तेजस्वी तुम्हारे चरण कमलों में पूर्ण सिद्धियों का अपार भण्डार ही तो सर्व शक्ति का पूर्ण हरण है

 

१३) हे सर्व योग के आतंरिक शक्ति का अनुभव कराने वाले समस्त भूमण्डल के दिव्य दृष्टा हे देवरहा हंस बाबा जी सर्व जगत का कल्याण करो कल्याण करो कल्याण करो

 

१४) हे परम दिव्य शक्ति के महा स्वरुप परम तेज के महा तेजस्वी प्रेम भाव की भावनाओं को जगाने वाले हे प्रेमवतारी जगत के कल्याण के लिए धर्मावतारी धर्म की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

१५)  सर्व ज्ञान की दिव्य भक्ति के आतंरिक योग की दृष्टि को प्रदान करने वाले परम दृष्टा परम भाव की परम शक्ति के परम आधार है जीवन जिसका ऐसे महावतारी श्री देवरहा हंस बाबा जी सनातन धर्म की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

१६) हे सर्व दरशन की सर्व दृष्टि के सर्व योग के महा दृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत के कल्याण करने की आतंरिक शक्ति के आतंरिक प्रभाव को फैला ही दो ताकि जगत का कल्याण हो कल्याण हो हे जगत का कल्याण करने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी

 

१७) हे आतंरिक योग की पूर्ण शक्ति के महा योगी महा अवतार है जिसका धर्म  वह श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत का कल्याण करें , कल्याण करें कल्याण करें।

 

१८)  हे सर्व योग की  दृष्टि के दर्शन के परायोग के महायोग महा शक्ति के महा प्रभाव से जगत के कल्याण की भावना को जागृत करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी संभव की समदृष्टि के योग से जन जन में सम प्रेम की भावना को जागृत कर के प्रेम भाव का सम दर्शन ही जगत  कल्याण का मूल हेतु होगा

 

१९) हे अचैतन्य अवस्था के चैतन्य स्वरुप आतंरिक भक्ति के चैतन्य अवस्था को प्राप्त कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत का कल्याण तुम्हारी ही दया का आधार है।  

 

२०) हे सर्व ज्ञान के दिव्य ध्यानी महा योग शक्ति के महा अवतारी भक्ति मार्ग के प्रेमानंद स्वरुप के अवतारी तुम्हारे ही चरण कमलों का पूर्ण आनंद ही जीवन परमाजय है।  दया करो दीनबंधु, दया करो।

 

२१) हे प्रेम भक्ति के प्रेम आनंद के प्रेम स्वरुप सर्व ध्यान की प्रेमाभक्ति अवस्था के प्रेम स्वरुप सर्व संकट के हरण करने वाले महा शक्ति दाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण कमलों की भक्ति का आनंद सर्व सर्वदा प्राप्त करता रहूं

 

२२) अन्तरंग योग के दिव्य दृष्टि के परम दृष्टा सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के परम ज्ञानी परम भाव परम  तत्ववेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय वंदन क्षण पल वन्दित हो

 

२३) अंतरंग भाव के आतंरिक योग के परम दृष्टा परम शक्ति के महा योग के महा अवतारी अन्तरंग योग शक्ति के पूर्ण प्रभाव   हे श्री देवरहा हंस बाबा जी सर्व भूमण्डल में शांति की स्थापना तुम्हारी जय जय कारा से सदा सदा ही हो

 

२४) सर्व ज्ञान के आतंरिक योग के परम दृष्टा पराशक्ति  के महा प्रभाव के प्रभावित दाता जगत के कल्याण के तुम्हारी दिव्य वाणी  आतंरिक स्त्रोत की मंगलदाय सन्देश का रूप होगा

२५)हे महायोग के अंतरंग शक्ति के महादृष्टा सर्व जगत के कल्याणकारी सन्देश का भावात्मक रूप एकता के एक ही आधार के सर्व पुंज आपकी जय  हो जय हो जय हो

 

२६) तुम्हारी सदा सदा जय हो श्री देवरहा हंस बाबा जगत का कल्याण करने वाले  कल्याणदाता तुम्हारी सदा सदा जय हो कृपा करो कृपानिधान। श्री देवरहा जी हंस बाबा जी दया करो। श्री देवरहा हंस बाबा दया करो करूँ भक्त वत्सल दया करो

 

१) हे सर्व दर्शन के पूर्ण  दृष्टि के सर्व दृष्टा अंतरंग शक्ति के पूर्ण दृष्टि का अन्तरंग अवस्था को प्रदान करके हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों में चरणीय वंदन स्वीकार करो दया करो दया करो दया करो

 

२)) हे अंतरंग योग अंतरंग दृष्टि के महादृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों के चरणाश्रित भाव का पूर्ण आश्रय  का आकांशी हूँ दया करो कृपा करो कृपा निधान परम दयालु श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही शरण में हूँ रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

३) हे अन्तरंग योग दृष्टि के परम योग ध्यानेश्वर परम त्याग के महात्यागी ज्ञान ध्यान के परम ध्यानेश्वर अंतरंग शक्ति के शक्तिदाता  हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही श्री चरण कमलों में श्रीनिय अभिवंदन नित्य निरंतर जिह्वा पर अभिनन्दन हो। हे दयालु कृपानिधान बाबा जी दया करो रक्षा करो।   तुम्हारी शरण में हूँ। दया करो

 

४) हे सर्व योग दर्शन के महायोगी परम दिव्य दृष्टि के परम स्वरुप दिव्य ज्ञान के परम शक्ति को कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी  कमलों में यही अनवरत करबद्ध प्रार्थना है। जीवन का हर क्षण हर पल तुम्हारे ही चरण पूर्ण आधारित हो

 

५) हे सर्व दृष्टि के परम शक्ति के परम योग शक्ति के शक्तिमय आतंरिक योग के दृष्टि के ध्यान कराने वाले तुम्हारे चरण कमलों में हर क्षण हर पल सानिध्य हो।  रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

६) हे जगत के कलयाणकारी बाबा जी परम शक्ति के परम प्रभाव से आध्यात्मिक शक्ति के ऊर्जा का प्रभाव सर भूमण्डल में गूँज जाए। परम शांति दिव्य वातावरण में दिव्य शक्ति के आतंरिक स्त्रोत जगत का कल्याण का ही कल्याणमय कल्याण का कारण बने। हे श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत का कल्याण करें, कल्याण करें, कल्याण करें

 

७) हे आतंरिक शक्ति के अंतरदाता परम ज्ञान के महाज्ञानी धर्म के पूर्ण धर्मीय वातावरण को बनाने वाले श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो धर्म के स्थापना करने वाले स्थापित महाशक्ति हो। अतः हे श्री देवरहा हंस बाबा जी धर्म की रक्षा कर सनातन धर्म की  रक्षा करो

 

८) हे आतंरिक शक्ति के महापुंज अंतरंग  भावनाओं के भावावित दाता प्रेम भाव के अनंत हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी प्रेमा भक्ति भाव को जागृत करके संपूर्ण भूमण्डल में श्री कृष्ण की भक्ति में ध्यान का गुणगान एकमात्र तुम्हारी कृपा से सहज प्राप्त हो।

 

९) हे भक्ति भाव के प्रेम के पूर्ण विधाता सर्व दृष्टि के आनंद दाता सर्व ज्ञान के सर्व परम ग्यानी ज्ञान भक्ति के दाता तुम्हारे  ही चरण कमलों में हे श्री देवरहा हंस बाबा जे प्रणाम है। प्रेमनित प्रेम भाव का पूर्ण प्रेमानंद परम अवस्था को प्राप्त करे।

 

१०) हे भावानंद के परम स्वरुप भाव भक्ति के परम भक्ति के दाता  हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो प्रेम भक्ति के भाव विधाता हो। तुम्हारी ही शरण में हूँ।  भक्ति के भक्ति दाता भक्ति का दान करो

 

११) हे दिव्य शक्ति के महा शक्तिमान योग दर्शन के महायोग हे महा योग दृष्टा परम योग के त्याग के महा परम त्यागी ज्ञान योग के परम महा ज्ञानी अंतरंग शक्ति के योग दाता अंतरंग भाव के परम विधाता हे श्री हंस देवरहा बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों में जीवन का एकमात्र आश्रय है। शरणागत के शरण दाता शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो  रक्षा करो

 

१२) हे अंतरंग शक्ति के आतंरिक योग दृष्टा परम योग के ध्यान के अंतर ज्ञानी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का परम ज्ञान सर्व भूमण्डल में जो फैलेगा यही परम शक्ति का कारण होगा हे परम शांति के शांतिदाता संपूर्ण भूमण्डल में शांति को स्थापित कर स्थापित करो हे शांति दाता श्री  देवरहा हंस बाबा जी

 

१३) हे परम दिव्य शक्ति महा शक्ति ज्ञान योग  के महा ज्ञानवान शक्ति दर्शन के सर्व शक्तिमान हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का धर्म ज्ञान सर्व भूमण्डल में जब फैलेगा यही तो विश्व शांति का कारण  होगा। हे शांति के परम स्वरुप संपूर्ण विश्व में शांति का वातावरण बना दो। हे शांति के परम स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी सदा सदा ही जय हो

 

१४) हे आनंद ध्यान के अनतर्ज्ञान के महासागर स्वरुप महाशक्ति के शाक्तिदाता सर्व भाव के परम विधाता जग जीवन के मंगलकारी ज्ञान ध्यान के परम सुखकारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी दया करें कृपा करें दया करें

 

१५) हे अंतरंग ज्योति के ज्योतिमान परम प्रेम भाव को देने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों के चरणीय वंदन हर क्षण हर पल करता रहूं  दया करो दया करो। हे दीनबंधु कृपानिधान शरणागत रक्षा करो। तुम्हारी सदा सदा ही जय जयकार हो

 

१६) हे अन्तरंग ध्यान के ध्यानावस्था में अवस्थित करने वाले ज्ञानानंद के परम स्वरुप परम शक्ति के महा तेज पुंज हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी परम वाणी जगत के कल्याण कल्याणकारी हो जगत कल्याण करे कल्याण करे।

जगत का कल्याण करे।

 

१७) हे अन्तरंग शक्ति के महारक्षक आतंरिक भावना से भवित दाता आतंरिक दृष्टि के पूर्ण दृष्टिमान हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणीय आश्रय परम आश्रय है चरण शरण के आश्रय दाता चरण शरण में आश्रय प्रदान करो, तुम्हारी सदा सदा जय हो

 

१८) हे परम ध्यान के महध्यानि योग शक्ति के परम शक्तिमान परम दृष्टि के पूर्ण दृष्टिमान श्री देवरहा हंस  तुम्हारे चरण शरण के नित्य निरंतर ध्यान चलता रहे यही शरणागत की इच्छा है पूरी करो पूरी करो हे कृपानिधान पूरी करो

 

१९) हे महाभाव के भावानंद महाशक्ति के महापुंज प्रेम भाव के भक्ति को जागृत करने वाले श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो जीवन के आधार हो रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

२०) हे अंतरंग योग भावना के पूर्ण भावित  दृष्टा परम दिव्य शक्ति के आतंरिक योग दर्शन के परम ज्ञान दाता अंतरंग दृष्टि के पूर्ण विधाता ज्ञान ध्यान के महा धुरंधर श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा तुम्हारे चरण का रस वादन सदा सदा प्राप्त होता रहे

 

२१) हे ज्ञान के दृष्टि के आतंरिक महाज्ञानी सर्व शक्ति के आतंरिक शक्तिदाता परम भावनाओं के परम विधाता सर्व शक्ति के सर्व परम शक्तिमान सर्व आनंद के आनंददाता परम भाव के पूर्ण भावना को जागृत करने वाले हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमल का चरणाश्रित आनंद का परम आशय हूँ। हे श्री जगत दाता रक्षा करो रक्षा करो

 

२२) हे परम ज्ञानवान परम ध्यानानन्द के ध्यान स्वरुप परम दिव्य शक्ति के हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी कीर्ति का गुणगान फैलता रहे यही जगत के कल्याण के सैम भावनाओं जगाने वाला परम आधार होगा

 

२३) हे जगत के पालनहार सर्व शक्ति के संचालनकर्ता पूर्ण भाव के भाक्तिदाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही शरण के प्रभाव से भूमण्डल में शांति और कल्याण का दिव्य सन्देश जन जन  में जागृत हो। हे कृपानिधान तुम्हारे चरण कमल में यही अभिनन्दन करता हूँ। हे श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की प्रार्थना स्वीकार करो स्वीकार करो

 

२४) हे सर्व योग दर्शन के आतंरिक दृष्टि के महादृष्टा सर्व शक्ति के महा देव शक्ति के आतंरिक महा दृष्टा सर्व ज्ञान को अनुभव कराने वाले महाज्ञानी हे श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही परम दिव्य ज्ञान की वाणी संपूर्ण जगत में फैले तब विश्व में शांति की लहर फैलते हुए भक्ति साम्राज्य फैलेगा

 

२५) हे आतंरिक योग के अंतरंग श्रोत अंतरंग शक्ति के महा संचालन करने वाले परम योग के महा योगी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी परम दिव्य वाणी का सन्देशावादन पुरे विश्व में मूल कारण होगा। अतः  कल्याणकारी के महा शक्तिवान विश्व का कल्याण करो। शांति की स्थापना सनातन धर्म की स्थापना करो तुम्हारी सदा ही जय हो जय हो जय हो। हे कल्याणकारी मंगलकारी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी शरण में हूँ। शरणागत  की रक्षा करो रक्षा करो

 

१) हे सर्व जंगल के आनंद दृष्टा परम ज्ञान के मंगलकारी सर्व आनंद के आनन्दीय शक्ति को प्रदान करने वाले सर्व प्रेम की दिव्य अनुभूति को प्रदान करने वाले सर्व भाव की दिव्य अवस्था को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरणीय वंदन चरणीय आनंद चरण कमल का परम आधार हो

 

२) हे सर्व योग के परम दिव्य शक्तिशाली दिव्य ध्यान के दिव्य दृष्टा परम शक्ति के पूर्ण अवतारी सर्व दर्शन के दर्शन दृष्टा हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरणों की चरणीय स्तुति सतत सतत करता रहूं

 

३) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के  स्वरुप सर्व दर्शन की सर्व शक्ति के महा स्वरुप दिव्य दृष्टि के परम शक्ति के शक्तिदाता चरणाश्रित भाव के आश्रयदाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय आनंद नित्य निरंतर सतत प्राप्त करता रहूं

 

४) हे परम दृष्टि के आनंद दृष्टा परम योग के महा तपस्व चरणानंद के चरणीय आनंद को जागृत करने वाले हो

 

३) हे परम योग दर्शन परम योग शक्ति परम योग ध्यान परम योग भाव  के परम भावानंद स्वरुप तुम्हारी दिव्य कृपा की दृष्टि से आतंरिक भाव के प्रेम का पूर्ण आनंद सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि से  प्रेम की सर्वात्म भाव की दिव्य अनुभूति में श्री चरणों के चरणाश्रित भाव से नित्य निरंतर प्राप्त करता रहूं हे श्रीदेवराहा हंस बाबा जी तुम्ही तो जीवन के परम आश्रयदाता हो

 

४)हे सर्वात्म भाव की दिव्य  दाता सर्व ज्ञान की दिव्य बुद्धि के बुद्धिदाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणों के आश्रय से आश्रित जीवन के आश्रय दाता प्राप्त होता रहे

 

५)  हे सर्वांग दृष्टि के परम तत्त्व दृष्टा परम तत्त्व ज्ञान के परम तत्त्व दर्शी ध्यान ज्ञान के महा धुरंधर परम तेज के महा तपस्वी बल बुद्धि  विद्या के शक्तिदाता सर्व ज्ञान के प्रेम विधाता सर्व मंगल के दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाब जी तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणीय वंदन परम सुख प्रदान करने वाला जीवन का एकमात्र आधार हो

 

६) हे श्री योग दर्शन के आतंरिक योग दृष्टा परम योग के महा  तपस्वी त्याग ज्ञान के सर्व दृष्टा सर्व दृष्टि के आनंद दृष्टा परम भाव के प्रेमावतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे हो चरण कमलों का चरणीय आनंद  चरण शरण में प्राप्त होता रहे।

 

७)  हे सर्व योग के परम आनंद के स्वरुप सर्व दृष्टि के  प्रेमानंद अवस्था को प्राप्त किये हुए प्रेमावतारी बाबा  श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का यशगान पूर्ण आश्रय का पूर्ण समर्पण समर्पित योग का ज्ञान है

 

८) हे  दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्व भाव  की अनुभूति के प्रेमांदित स्वरुप सर्वत्र भाव की दिव्य आनंद की पूर्ण अवस्था को प्राप्त  कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो जीवन के परम आधार हो जगत का कल्याण करने  के लिए ही तो धरा पे अवतरित हुए हो हे जगत कल्याणकारी बाबा जी कल्याण करो कल्याण करो

 

९) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के’ परम दृष्टा तत्वज्ञान के परम तत्त्व ज्ञानी प्रेम ध्यान के महाध्यानी   प्रेम की आतंरिक भावनाओं को जगाने वाले सर्व भूमण्डल के ज्योतिर्मय स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण में चरणीय वंदन नित्य निरंतर वन्दित हो कृपा करो दया करो

 

१०) हे अंतरंग भाव के दिव्य दृष्टा प्रेम की प्रेमाभक्ति के प्रेमांदित स्वर्णो पूर्ण आनंद के सर्व आनंदकारी सर्व दृष्टि के प्रेमांदित अवस्था को प्राप्त कराने वाले सर्व ज्ञान की पूर्ण अवस्था की स्थिति को प्राप्त कराने में तुम्हारे श्री चरणों का पूर्ण आश्रय प्रदान हो

 

११)हे सर्व शक्ति के महास्वरूप सर्व ज्ञान के महा दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले ज्ञानी ध्यान ज्ञान के पूर्ण अवतारी सर्व दर्शन के दर्शित दृष्टा सर्व शक्ति के महाशक्तिमान प्रेम भावना के भावित दृष्टा सर्व अनुभूति के प्रेमांदित भाव के सर्व साक्षात्कारी सर्व दर्शन के पूर्ण ज्ञात्वा सर्व बुद्धि  के बुद्धिदाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी चरण कमल का वंदन जीवन का एकमात्र आधार हो। हे सर्व योग दृष्टि के परम तत्ववेत्ता तत्वज्ञान की तत्वदर्शित अवस्था को पूर्ण प्राप्त किये हुए तत्वदर्शी तुम्हारे श्री चरण कमलों चरणाश्रित आनंद जीवन का ही परम आनंद है

 

१२) हे श्री धर्मावतारी धर्म की रक्षा करना ही जिनका एकमात्र उद्देश्य है वही श्री देवरहा हंस बाबा जी धर्म की रक्षा करें  करें

 

१३)  हे सर्व दर्शन के प्रेमांदित योग के सर्व दृष्टा सर्व  ज्ञान की दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले परम ध्यानी भक्ति भाव की भावनाओं को जागृत करने वाले हे प्रेमा भक्ति के स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही  चरण कमल का चरणीय वंदन चरण शरण का आधार है

 

१४) हे सर्व योग के अंतरंग दृष्टा अंतरंग शक्ति के आतंरिक अनुभवी ज्ञान योग के परम महाज्ञानी ज्ञान दर्शन की ज्ञानावस्था के महाज्ञानी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों में पूर्ण पूर्ण समर्पित हूँ दया करो कृपा करो कृपानिधान

 

१५) हे अन्तरंग भाव की दृष्टि के पूर्ण दृष्टा  अंतरंग ज्ञान की दिव्य अनुभूति के परम प्रेमी भाव भक्ति योग दर्शन  भक्ति दर्शन ज्ञान दर्शन की परम अवस्था है जिनकी वो श्री देवरहा हंस बाबा जी जीवन के एकमात्र परम आश्रय है। हे आश्रित
दाता दया करो दया करो दया करो

 

१६) हे परम योग के  अंतरंग ज्ञानी प्रेमानंद के प्रेम भाव के परम भावातुरता को प्राप्त कराने वाले हे भावानंद के  परम भाव के स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही शरण हूँ शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो

 

१७) हे सर्व योग दर्शन के महादृष्टा महाशक्ति के तेजपुंज तुम्हारे चरणों का  चरणाश्रित आनंद अहर्निश भाव से सतत प्राप्त करता रहूं

 

१८) हे सर्व दर्शन के सर्व दृष्टि के  सर्व आधार परम दिव्य शक्ति के परमानन्द स्वरुप श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री  वंदन जीवन का परम आधार हो यही शरणागत की प्रार्थना स्वीकार करो हे करुणानिधान हे भक्तवत्सल  रक्षा करो रक्षा करो

१९) हे सर्व योग की दिव्य दृष्टि के आनंद दृष्टा दिव्य प्रेम की आतंरिक शक्ति दाता सर्व ज्ञान के पूर्ण आनंदित हे परम योगी जीवन के परम आश्रय को देने वाले हे आश्रय दाता श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्हारे ही चरण कमलों में चरणाश्रित वंदन जीवन का सतत वंदनीय वंदन स्वीकार करो स्वीकार करो

 

२०) हे अन्तरंग अवस्था के दिव्य दृष्टा परम शक्ति के तेज स्वरुप सर्व ध्यान की पूर्ण अनुभूति को प्राप्त  कराने वाले परम भाव के परम दृष्टा परम ज्ञान के परम ज्ञानी दिव्य शक्ति के अन्तरंग शक्ति दाता श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय गुणगान सपूर्ण  विश्व का कल्याण का ही कल्याणकारी सन्देश है। अतः जगत का कल्याण करो परम शांति के पूर्ण शांतिदाता शांति की पूर्ण स्थापना करो स्थापना करो

 

२१) हे सर्व दर्शन की दृष्टि के परम दृष्टा प्रेम दर्शन की दृष्टि के प्रेमावतारी ज्ञान दर्शन दृष्टि के ज्ञानावतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे अवतार का मूल उद्देश्य धर्म की स्थापना शांति की स्थापना का मूल आशय  यही है

 

२२) हे सर्व योग दर्शन पूर्ण प्रेम दर्शन पूर्ण ध्यान दर्शन सत्य के आधार की सत्य दर्शन की सत्य अनुभूति का सत्य शरण तुम्हारे श्री चरणों में प्राप्त हो अतः हे प्रेम दीन दयालु देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी  जय हो जय हो जय हो सदा सदा ही जय हो

 

२३) हे सर्व दर्शन के सर्व दृष्टा सर्व योग के परम योगी प्रेम  ध्यान के प्रेमानंद स्वरुप सर्व भावना की दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले आतंरिक  शक्ति के परम दाता हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरणीय गुणगान जीवन का परम आधार नित्य निरंतर सर्व भूमण्डल में गुंजायमान हो

 

२४) हे परम त्याग के महायोगी सर्व  दर्शन की सर्व दृष्टि के महा दृष्टा अन्तरंग शक्ति के अन्तरंग योग की सर्व दृष्टि के महादृष्टा अन्तरंग शक्ति के अंतरंग योग की परम दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले परम शक्ति के पूर्ण शक्तिमान ज्ञान दृष्टि के महादृष्टा जिनकी चरण की भक्ति का अनन्य योग  मूल आधार है वो श्री देवरहा हंस बाबा जी जीवन के एकमात्र आश्रयदाता हैं जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी जय जयकार हो। तुम्हारा सर्व भूमण्डल में जगत का कल्याण करो श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही धर्म के रक्षक हो तुम्ही धर्म के रक्षक हो सनातन धर्म की रक्षा करो

 

२५) हे सर्वानंद दिव्यानंद प्रेमानंद पूर्णानंद ज्ञानानंद के पूर्ण आनंद दायिनी अवस्था को प्राप्त कराने वाले परम आनंद दाता श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो आनंद के महास्वरूप हो हे आनंद दाता श्री देवरहा हंस बाबा जी सर्व भूमण्डल में दिव्य आनंद की लहरों का लहराता हुआ लहर सर्व भूमण्डल में आच्छादित हो

 

२६) हे आनंद प्रिय दृष्टा सर्व ज्ञान के दिव्य दर्शन की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दाता सर्वत्र भाव की दिव्य शक्ति को प्राप्त कराने वाले सर्वानंद प्रेमानंद भावानंद के भाव अवतारी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों का एकमात्र जीवन का आधार हो रक्षा करो रक्षा करो  शरणागत रक्षक रक्षा करो।

 

२७) अन्तरंग भाव की दिव्य दृष्टि के समभाव के समदृष्टा सर्व ज्ञान ध्यान के परम पावन दिव्य दृष्टि के दिव्यानंद के सर्वत्र आनंद दाता सर्व दृष्टि के प्रेम की प्रेमांदित अवस्था के पूर्ण योग को प्राप्त कराने वाले हे परम योग के दिव्य दृष्टा सर्व शक्ति के शाक्तिदाता श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही शरण में हूँ शरणागत की रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो

 

२८) हे सर्व दर्शन की सर्व दृष्टि के महा दृष्टा सर्व शक्ति के पूर्ण योग के शक्तिदाता चरण शरण  चरणाश्रित भाव को पूर्ण जगाने वाले चरणानंद की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरणीय गुणगान सर्व भूमण्डल मंगलकारी का दिव्य सन्देश हो। हे महा कल्याणकारी बाबा जगत का कल्याण करो जगत का कल्याण करो शांति  वातावरण में जगत के वातावरण में ज्ञान प्रेममय वातावरण हो

 

२९) हे सर्व योग दर्शन परम योग दृष्टि चरण के चरणीय आनंद का आतंरिक अनुभव अन्तरंग शक्ति के आतंरिक प्रभाव से सर्व जान को ज्ञान देने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी हे शांति के परम स्वरुप शांति के परम दाता शांति हो शांति हो सर्व भूमण्डल में शांति हो।

 

३०) सर्व शक्ति के दिव्य दृष्टि के परम योग दृष्टा परम  दिव्य शक्ति के महायोग के आतंरिक शक्ति दाता सर्व दर्शन के सर्व दृष्टि के सर्व योग के परम विधाता  श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण शरण का चरणाश्रित भाव का दिव्य आनंद परम मंगलकारी हो

 

३१) हे सर्वत्र ज्ञान की दिव्य दृष्टि के दिव्य योग दृष्टा सर्व ज्ञान की दिव्य अनुभूति के परम तत्वदर्शी परम भाव की अन्तरंग अवस्था के आतंरिक ज्ञानी सर्व दर्शन प्रेम दर्शन भाव दर्शन भक्ति दर्शन के परम स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा चरणों का यशगान सर्व भूमण्डल में शांति का ही सन्देश है

 

३२) परम भाव के दिव्य दर्शन के आतंरिक  दृष्टा सर्व आनंद की दिव्य अनुभूति के सर्व आनंद स्वरुप परम शक्ति के परम योग के शक्तिमान बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय वंदन जीवन में परम शांति का पूर्ण आधार है दया करो रक्षा करो

 

३३) हे सर्वत्र ज्ञान की दिव्य दृष्टि के दिव्य योग के परम महा ज्ञानी महाशक्ति के महा  पूर्ण दर्शन दृष्टा सर्व शक्ति के आतंरिक योग के शक्तिदाता तुम्ही जीवन के आधार हो तुम्हारे चरणों के चरणाश्रित भाव का परम आधार

 

३४) हे सर्व योग दर्शन के परम योग दृष्टा सर्व ‘भाव की दिव्य अनुभूति के परम तपस्वी ज्ञान ध्यान भक्ति के भाव दाता सर्व दृष्टि के प्रेम दर्शन के प्रेमावतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की वंदन का वन्दित भाव प्रेम दर्शन की प्रेमावस्था का चरणाश्रित भाव प्रेमाभक्ति के प्रेम योग का दर्शन है

 

३५) सर्वात्म भाव की दिव्य दृष्टि के पूर्ण अनुभव की अन्तरंग शक्ति के आन्तरिक योग का दर्शन दिव्य प्रेम की आन्तरिक अनुभूति का आतंरिक योग हे अन्तरंग दर्शन की  दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमल का चरणीय गुणगान नित्य निरंतर करता रहूं

 

३६)  हे परम दिव्य शक्ति के आन्तरिक योग के दृष्टा अन्तरंग शक्ति के अन्तरंग योग के अनुभवी दाता हे श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमल का चरणीय वंदन सतत भाव से नित्य निरंतर वन्दित हो

 

३७) हे सर्वज्ञान की दिव्य दृष्टि के अन्तरंग शक्ति के परम दृष्टा अन्तर भाव की दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमल का वंदन सतत भाव की अहर्निश भावना में नित्य निरंतर करता रहूं। हे अन्तरंग भाव की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्व शक्ति के आन्तरिक योग की अनुभूति को  वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरणीय दर्शन अनवरत पाता रहूं।

 

३८) हे  अंतरंग भाव के दिव्य दृष्टि के पूर्ण ज्ञाता सर्व  दर्शन की दिव्य दृष्टि के प्रेम विधाता सर्व भाव का दिव्य आनंद प्रेम की प्रेमावस्था का पूर्ण आनंद  श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमल के दर्शन का परम लाभ है

 

३९) आतंरिक भाव की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा अंतरंग शक्ति के आतंरिक योग के अन्तरंग ज्ञानी प्रेम भाव की सर्व दृष्टि के सर्व अनुभव को प्राप्त कराने वाले हे परम अनुभवी श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणीय दर्शन परम भक्ति का मूल आनंद है

 

४०) हे सर्व ज्ञान के दिव्य दृष्टि के अन्तरंग योगी दिव्य प्रेम की पूर्ण अवस्था के आन्तरिक ज्ञाता सर्व दर्शन की दिव्य दृष्टि के परम आनंदनीय अवस्था को प्राप्त कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमल का चरणीय गुणगान यही तो है जीवन का परम आधार

 

४१) हे परम दिव्य शक्ति के आन्तरिक दृष्टा परम दिव्य भाव के सर्व दर्शन कर्त्ता आन्तरिक  भावना की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय आश्रय जीवन का परम आश्रय हो

 

४२) आतंरिक भावना की दिव्य दृष्टि के दिव्य योग का परम दर्शन परम शक्ति के परम योग का परम आनंद तुम्हारे दर्शन की दृष्टि के पूर्ण दृष्टि का पूर्ण सार है। हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमल का चरणीय आनंद चरणीय दर्शन का चरणीय अनुभव नित्य निरंतर अन्तरंग भाव से प्राप्त करता रहूं

 

४३)  हे सर्व योग की परम दृष्टि के परम दृष्टा सर्व योग की दिव्य अनुभूति के पूर्ण अनुभवी  आतंरिक शक्ति के अन्तरंग योग के परम दिव्य करने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय दर्शन भाव भक्ति का प्रेम का आनंद जीवन के क्षण क्षण पल पल में प्राप्त होता रहे। यही शरणागत की आतंरिक हार्दिक करबद्ध प्रार्थना है स्वीकार करो स्वीकार करो स्वीकार करो।

 

४४) हे अन्तरंग ज्योति के महापुंज महाशक्ति के महाशक्तिमान अन्तरंग योग दर्शन के दिव्य दृष्टा परम दिव्य शक्ति के आतंरिक ज्ञाता सर्व भाव के दिव्य दृष्टि के प्रेमानंद स्वरुप  श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण शरण में चरण का आश्रय सतत भाव में नित्य निरंतर की अहर्निश भावना से प्राप्त होता रहे

 

४५) हे दिव्य दर्शन की दिव्य दृष्टि के दिव्य दृष्टा दिव्य ज्ञान की दिव्य अनुभूति के परम स्वरुप परम भक्ति के परम ध्यान के परम योगी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमल का चरणीय दर्शन चरणीय आनंद चरणीय प्रीति नित्य निरंतर सतत प्राप्त करता रहूं

 

४६) हे सर्व ध्यान के परम ध्यानी सर्व दृष्टि के आनंद दाता प्रेम भाव के पूर्ण विधाता चरण कमल की भक्ति को अनन्य भाव की अनन्यता के अनन्य प्रीति से प्राप्त  कराने वाले हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का गुणगान महिमा का अपरंपार जीहवा पर नित्य निरंतर निशदिन गाता रहूं

 

४७) हे  परम शक्ति  के परम योग के परम दृष्टा परम ज्ञान की दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले अंतरंग ज्ञानी ज्ञान ध्यान के परम तपस्वी श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्हारे ही चरण कमलों में पूर्ण समर्पित भाव का हार्दिक अभिवंदन करता हूँ। स्वीकार करो स्वीकार करो हे कृपनिधान दीनबंधु शरणागत की प्रार्थना स्वीकार करो

 

४८) सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के परम ज्ञानी ज्ञान ध्यान के परम योग के परम तपस्वी तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणाश्रित भाव हे श्री देवरहा हंस बाबा जी सदा सदा ही प्राप्त करता रहूं.

 

४९) ज्ञान ध्यान के  परम ज्ञानी प्रेम भाव के अंतर्यामी  सर्व दृष्टि के अन्तरंग दृष्टा आतंरिक शक्ति के पूर्ण दाता हे श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की चरणीय वंदना का वन्दित भाव सतत सतत वंदनीय हो

 

५०) हे  परम योग के परम योगेश्वर  परम ध्यान के महा ध्यानेश्वर महा शक्ति के पूर्ण महा शक्तेश्वर हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का गुणगान यश और कीर्ति का सर्व  भूमण्डल में जो गुंजन होगा वही सर्व जगत के कल्याण का परम सन्देश होगा जय हो जय हो सदा सदा तुम्हारी जय हो कृपानिधान दीनबंधु तुम्हारी सदा जय हो

 

५१) हे सर्वानंद भाव के दिव्य दर्शन के परमयोगी महाशक्ति के अन्तरंग शक्ति के दिव्य दृष्टा परम भाव की पूर्ण अवस्था को प्राप्त कराने वाले प्रेम भक्ति के परम प्रेमानंद स्वरुप हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों की अनंत नित्य निरंतर प्राप्ति होती रहे

 

५२) हे परम भाव के परम ज्ञान दृष्टा परम अंतरंग शक्ति के महा अंतरंग शक्तिमान हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणकमलों की चरणाश्रित वंदना अहर्निश भाव से करता रहूं।  

 

५३)हे सर्व ज्ञान के महा धुरंधर परम भाव के आतंरिक दृष्टा प्रेमाभक्ति के परम  प्रेमाश्रित स्वरुप के प्रेमवतारी हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों की अनन्य भक्ति अनन्य भाव की अनन्यता की पूर्ण शरणागति का अभिलाषी हूँ।

 

५४) हे परम  योग के परम दृष्टा परम शक्ति के पूर्ण शक्तिमान महायोग के पूर्ण दृष्टि को प्रदान करने वाले हे महायोग दर्शन के दृष्टिमान दृष्टा श्री श्री देवरहा  हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों में चरण भाव का चरणीय आनंद सतत प्राप्त करता रहूं

 

५५) हे अंतरंग ज्ञान के पूर्ण दृष्टा अन्तरंग शक्ति के महाशक्तिमान सर्व भाव की दिव्य दृष्टि को  प्रदान करने वाले परम आनंद के स्वरुप हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे तुम्हारे प्रेम स्वरुप के दिव्य दर्शन को पाता रहूं

 

५६) हे परम दृष्टा परम ज्ञान के परम ज्ञानी परम योग के महायोगी भक्ति दर्शन की धरम अवस्था प्राप्त किए हुए हे प्रेमानंद स्वरुप भावानंद के पूर्ण दृष्टा श्री श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का दर्शन महा भक्ति दर्शन का पूर्ण दर्शन है

 

५७) हे अन्तरंग ज्ञान के दिव्य दृष्टा परम ज्ञान के सर्व दृष्टा आनंद दृष्टि के परम दृष्टा हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों की महिमा का यशगान सर्व भूमण्डल में ख्यातिमान हो

 

५८) हे सर्व भाव के सर्वानंद भावानंद प्रेमाभक्ति के प्रेमानंद सर्व योग के परम अवस्था  को प्राप्त किये हुए श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारेचरणों चरणों की महिमा का प्रताप ही सर्व संकट सर्व विघ्न का नाश करने वाला है।

 

५९) हे  दिव्य दृष्टि के परम दृष्टा सर्व ज्ञान के महाज्ञानी सर्व दर्शन के अन्तर्यामी हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों का प्रताप सर्व संकट को हरण करने वाला है। दया करो हे कृपानिधान दया करो।

 

६०) हे प्रेम ध्यान के महा ध्यानी चरण शरण की रक्षा करने वाले शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की रक्षा करो

 

६१) हे महा भाव की भावानंद अवस्था को प्राप्त कराने वाले प्रेम की पूर्ण अवस्था को देने वाले चरण शरण के शरणागत रक्षक भाव भक्ति प्रेम के प्रेमानंद अवस्था में प्रेम के स्वरुप श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की रक्षा करो हे कृपानिधान शरणागत की रक्षा करो

 

६२) हे अन्तरंग भाव की दिव्य दृष्टि को जगाने वाले अन्तरंग शक्ति में पूर्ण अवस्था को प्राप्त कराने वाले श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो जीवन के परम आधार हो हे परम कृपालु शरणागत  की रक्षा करो रक्षा करो

 

६३) हे सर्वानंद के दिव्य दृष्टा परम ज्ञान के अंतर्ज्ञानी  महाशक्ति के अंतरंग दृष्टा सर्वज्ञान की दिव्य अनुभूति को प्राप्त कराने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण के प्रताप से ही सर्व संकट हरण का हरणीय दृष्टि नित्य निरंतर प्रदान करो हे कृपा निधान परम दयालु दीनबंधु तुम्हारी ही शरण में हूँ रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

६४) हे सत्याधार के सत्य दृष्टि के परम सत्यवान आतंरिक योगदृष्टि के पूर्ण के परम सत्यवान आतंरिक योग दृष्टि के पूर्ण सर्वज्ञानी परम योग शक्ति के ध्यान दृष्टा सर्व भाव दृष्टि के भावित दृष्टा हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही शरण में हूँ, शरणागत की रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो, हे कृपानिधान दीनबंधु रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

६५) हे सर्व योग के परम दृष्टा परम ज्ञान के महा ज्ञानी ज्ञान ध्यान के महा धुरंधर परम तपस्वी परम त्यागी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण के प्रताप से भवसागर  तारणीय तरण अवस्था तुम्हारी सहज कृपा की देन है

 

६६) हे ज्ञान योग  के परम दृष्टि के परम दृष्टा सर्व ध्यान के सर्वज्ञानी प्रेम ज्ञान के महाज्ञानी सत्य दृष्टि के परम सर्व दृष्टिवान श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों के परम प्रताप से मुक्ति प्राप्त हो जाए तुम्हारी कृपा दृष्टि का परम आश्रय है

 

६७) हे महायोग के शक्ति के परम शक्तिमान परम दिव्य दृष्टि के परम दिव्य दृष्टा सर्व भाव के दिव्य अनुभूति के अनुभवी योगी के दर्शन सत्य दर्शन है। जिनका जीवन के आधार जिनका परम ध्यान वह महा ध्यानी है। वह श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही जीवन के परम आधार हो सदा सदा रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।  हे संकट हरने वाले रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

६८) हे सतरंग भाव  प्रेम के पूर्ण प्रेमानंद के स्वरुप सर्व ज्ञान के दिव्य दृष्टि के महाज्ञानी ज्ञान योग महा योग के महा तेजस्वी श्री श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों के चरणीय वंदन वंदना के वंदनीय वंदन सत सत वन्दित है

 

६९) सर्व संकट के दिव्य  शक्ति के महा शरण के पूर्ण आनंद के दाता श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण कमलों में संकट का हरण हो।

 

७०) हे परम ज्ञान के महा ज्ञानेश्वर ध्यान योग के परम दृष्टा दिव्य शक्ति के परम शक्तिश्वर श्री श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारे चरणों का चरणीय दर्शन सर्व संकट का हरण है।

 

७१ हे ध्यान ज्ञान के परम दृष्टि को प्रदान करने वाले ध्यानी ज्ञानी आतंरिक शक्ति के अंतरंग योग के परम दृष्टा चरणाश्रित  भाव के पूर्ण आश्रय को प्रदान करने वाले चरणाश्रय दाता श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणों का आश्रय दो आश्रय दो आश्रय दो

 

७२) पूर्ण योग सर्व योग ध्यान योग प्रेम योग के आतंरिक दाता , परम दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्वज्ञान की दिव्य अनुभूति के दाता हे श्री श्री देवरहा  हंस बाबा जी तुम्हारी महिमा का गान चहुँ दिशा में गुंजार हो

 

७३) हे अन्तरंग ज्ञान की दिव्य दृष्टि  के परम दृष्टा पूर्ण आनंद के सर्व योग के परम दृष्टि के पूर्ण दृष्टिवान सर्वत्र ज्ञान के दिव्य दृष्टि के आंतरिक दृष्टा हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की अनन्य भक्ति का अहर्निश आनंद सदा सदा ही प्राप्त हो

 

७४) आतंरिक  ज्ञान के दृष्टि को प्रदान करने वाले आतंरिक अवस्था के दिव्य प्रेम को देने वाले परम ज्ञान के ज्ञानी परम ध्यान के ध्यानेश्वर तुम ही जीवन के रक्षक  हो , हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

७५) हे अंतरंग भाव  की परम दृष्टि के पूर्ण दृष्टा सर्व योग के दृष्टि के आतंरिक भाव के अंतरंग योग दृष्टा प्रेम की अंतरंग अवस्था की दिव्य अनुभूति को  प्राप्त कराने वाले परम योग दृष्टि के हे महा दृष्टा श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों का चरणीय वंदन जीवन का परम आधार है।

 

७६) हे अंतरंग अवस्था के अंतरंग दृष्टि के परम महा दृष्टा परम शक्ति के महा शक्तिमान अंतरंग दर्शन दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे  ही चरण कमलों का चरणीय वंदन जिह्वा पर क्षण क्षण पल पल हुई अवस्था में वन्दित हो। दया करो दया करो हे कृपा निधान दया करो।

 

७७) हे अंतरंग भाव के परम दिव्य दृष्टा प्रेम दृष्टि के परम दिव्य प्रेम की पूर्ण अवस्था को प्रकट करने वाले हे प्रेमावतारी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण शरण में शरणागत हूँ शरणागत की रक्षा करो  रक्षा करो रक्षा करो

 

७८) हे प्रेमानंदी सत्यानंदी ज्ञानानंदी भावानंदी के योगेश्वर श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी चरण शरण में शरणागत हूँ शरणागत की  रक्षा करो रक्षा करो

 

७९)  हे प्रेमानंदी सत्यानंदी ज्ञानानंदी भावानंदी के योगेश्वर श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण की चरण भूमि की भावना की शरण प्राप्त होती रहे हे दीनबंधु हे दयालु कृपा करो कृपा करो कृपा करो

 

८०) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के परम दृष्टा परम योग की परम अवस्था को प्राप्त किये हुए हे श्री देवरहा हंस  बाबा जी तुम्हारी महा प्रेम की आतंरिक योग का दर्शन जगत के कल्याण का कल्याणकारी सन्देश होगा।

 

८१) हे दिव्य शक्ति महा शक्ति योग शक्ति के ज्ञान योग के परम दृष्टा भावना से प्रेमांदित अवस्था के हे प्रेमानंद स्वरुप श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे  ही चरण कमलों में बार बार बलिहारी जाता हूँ। दया करो कृपानिधान दया करो दीनबंधु रक्षा करो रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो

 

८२) हे आतंरिक भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले आतंरिक योग के योग दर्शन के दृष्टि के महायोग दृष्टा अन्तरंग दर्शन के आतंरिक दृष्टि के परम दृष्टिवान महा योगेश्वर हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की महिमा की दिव्य वाणी का आतंरिक योग जगत के कल्याण का सन्देश होगा।

 

८३) हे परम त्याग के हे महाज्ञान के परम ज्ञानी महायोग दर्शन के दृष्टि  के पूर्ण दृष्टा श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय ज्ञान सर्व भूमण्डल में गुंजायमान हो

 

८४) हे आतंरिक ज्ञान के योग दृष्टा अंतरंग शक्ति के आतंरिक ज्ञानवान दिव्य दृष्टि के दिव्य प्रेम के परम दिव्य योगी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की  भक्ति ही जीवन का परम आश्रय है

 

८५) हे अन्तरंग भाव के दिव्य शक्ति के महयोगी आतंरिक शक्ति के महायोग दृष्टि  को प्रदान करने वाले हे महा दृष्टा श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों के प्रताप से ही प्रेम की आतंरिक भावना का आतंरिक योग की पूर्ण अवस्था की प्राप्ति हो कृपा करो कृपा करो कृपा करो

 

८६) हे परम  योग दृष्टि के परम दृष्टा परम ज्ञान के आतंरिक योग के ज्ञानी दिव्य दृष्टि के परम भाव को प्राप्त कराने वाले हे परम आनंद के दिव्य दृष्टि के आतंरिक ज्ञानी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों में जीवन का परम कल्याण है  .तुम्हारे ही चरणों में जीवन का मूल आधार है

 

८७) हे परम सर्वज्ञान की दिव्य दृष्टि के परम योग दृष्टा सर्व सहक्ति के परम शक्तिमान दिव्यानंद परमानन्द के दिव्य अनुभूति को ‘प्राप्त कराने वाले  हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी ही शरण में शरणागत हूँ. रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

८८) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के परम दृष्टा परम शक्ति के परम योग के परम ज्ञानी सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के पूर्ण दृष्टा तुम्हारे आतंरिक वाणी का पूर्ण प्रताप संपूर्ण जगत में कल्याणकारी दृष्टि का सन्देश है।

८९) हे परम ज्ञान के महाज्ञानी योग ध्यान के ध्यानी ज्ञानी परम त्याग के परम तपस्वी परमानंद के परम स्वरुप श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणीं का चरणीय वंदन तुम्हारी ही वाणी का पूर्ण प्रभाव जगत के कल्याण का संदेशात्मक सन्देश होगा

 

९०) हे सत्य के आधार की सत्यनिष्ठ भावना को प्रदान करने वाले  सत्य की आतंरिक भावना की दिव्य शक्ति को देने वाले परम शक्ति के  ,ध्यान ज्ञान के परम तपस्वी हे श्री श्री देवरहा हंस तुम्हारे चरण कमलों में चरणाश्रित भाव को सदा  प्राप्त करता रहूं

 

९१) हे अंतरंग भाव की दिव्य दृष्टि के परम योग दृष्टा सर्व संकट को हरण करने वाले हरणीय दृष्टा हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्हारे ही चरणों के चरणाश्रित भाव का प्रत्यक्ष दर्शन करता रहूं। हे जीवन के परम आश्रय दाता दया करो दया करो दया करो

 

९२) हे सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले सर्व शक्ति के पूर्ण दृष्टा परम ध्यान के अंतरंग ज्ञानी परम योग के संकटहर्ता हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय आनंद का सतत अभिलाषी हूँ

 

९३) हे अन्तरंग भाव के दिव्य दृष्टा परम ज्ञान की दिव्य ज्योति के पूर्ण ज्योतिमान सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के अंतरण शक्ति के पूर्ण शक्तिमान हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे  महिमा चरणों का प्रताप जगत के पूर्ण कल्याण का सन्देश होगा

 

९४) हे सर्वानंद प्रेमानंद भावानंद की पूर्ण भाव अवस्था को प्राप्त कराने वाले सर्व संकट के हरणीय श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही श्री चरण कमलों की शरण प्राप्त करने का अभिलाषी रहूं

 

९५) हे सर्व संकट को हरण करने वाले परम भाव की पूर्ण भक्ति को प्रदान करने वाले चरण कमलों के चरणीय आनंद हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी प्राप्त कराते रहना प्राप्त कराते रहना प्राप्त कराते रहना। तुम्हारी  शरण में हूँ तुम्हारी शरण में हूँ तुम्हारी शरण में हूँ।

 

९६) हे सर्व ज्ञान की दिव्य  दृष्टि के परम योग परम योग दृष्टा सर्व ज्ञान की दिव्य दृष्टि के  आतंरिक दृष्टिवान प्रेम के प्रेमानंद स्वरुप के प्रेमावतारी परम भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान कराने वाले परम शक्ति के परम स्वरुप श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी  जय हो जय हो जय हो

 

९७)हे योग दृष्टि के योग अवस्था के पूर्ण योगी महा शक्ति के महा योग के परम दृष्टा हे श्री  श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हरी शरण में हूँ रक्षा करो। हे कृपानिधान परम दीनदयालु रक्षा करो रक्षा  करो

 

९८) हे सर्व ज्ञान के दिव्य दृष्टि के  परम मंगलकारी सत्यानंद परम ज्ञानी ज्ञान ध्यान के ज्ञान योग का महा दर्शन है जिसका महा शक्ति के महा प्रताप की वाणी जगत के कल्याण का कल्याणकारी सन्देश होगा। हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही जगत के कल्याण के भावी दृष्टा हो।

 

९९) हे अंतर ज्ञान के दिव्य दृष्टि के परम योग के परम दिव्य दृष्टा प्रेमाभक्ति के प्रेमांदित  अवस्था के पूर्ण स्वरुप सभी ज्ञान ध्यान को पूर्ण प्राप्त किये हुए श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी आतंरिक वाणी का मूल सन्देश जगत के कल्याण का मूल दर्शन है। कल्याण करो कल्याण करो हे जगत कल्याणकारी जगत का कल्याण करो।

 

१००) हे अन्तरंग योग दृष्टि के महा शक्तिमान महा ज्ञान ध्यान के महा धुरंधर भक्ति भाव के भक्ति दाता तुम्हारी आतंरिक वाणी का आतंरिक योग का जो दिव्य सन्देश है वह संपूर्ण जगत का कल्याण करने का ही कल्याणकारी सन्देश है। हे कल्याणकारी जगत का कल्याण करो कल्याण करो कल्याण करो।

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