मूल पुस्तक संख्या १ (आगे..)

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१०२) हे सर्व ज्ञान के दिव्य दृष्टि के प्रेम दृष्टा सर्व दर्शन के भाव भक्ति के प्रेम विधाता सर्व जगत को  देने वाले संदेशात्मक भाव से पूर्ण हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी जगत के कल्याण का कल्याणकारी वाणी का मूल उद्देश्य है।

 

१०३) हे अन्तरंग शक्ति अंतरंग योग दृष्टा आतंरिक भाव के पूर्ण भाव को प्रत्यक्ष  कराने वाले आतंरिक अवस्था के दिव्य प्रेम में आतंरिक भाव को प्राप्त कराने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों के चरणाश्रित भाव का पूर्ण  भाव प्राप्त करूँ।

 

१०४) हे परम भाव के  दृष्टि के पूर्ण दृष्टा श्री श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे पावन चरणों की अनन्य भक्ति का अनन्य भाव सक्षम जीवन का परम अवस्था है कृपा करो कृपा करो कृपा करो कृपानिधान कृपा करो।

 

१०५) हे परम योग के  परम तपस्वी परम दृष्टि  के परम दृष्टा सर्व शक्ति को प्रकट कराने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों का चरणीय वंदन सतत अहर्निश भाव  से पूर्ण वंदनीय हो।

 

१०६)हे आतंरिक योग के दिव्य दृष्टि के परम दृष्टा परम ध्यान के महा ध्यानी सर्व त्याग के पूर्ण धुरंधर सर्व शक्ति के शक्तिमान श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही नाम की महिमा यशगान का  गुणगान जिह्वा पर नित्य निरंतर करता रहूं , कृपा करो कृपा करो दीनदयालु कृपा करो

 

१०७) हे परम  ज्ञान के महा ज्ञानी प्रेमानंद के प्रेमावतारी तुम्हारे ही चरणों के चरणाश्रित भाव का पूर्ण आश्रय जीवन का परम आश्रय है। हे परम योग के परम दृष्टा ध्यान योग के आतंरिक दृष्टि को प्रत्यक्ष कराने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्हारे ही चरण कमलों का अभिनन्दन नित्य निरंतर अभिनंदनीय है दया करो कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

 

१०९) हे आतंरिक योग  दर्शन के पूर्ण दृष्टा अंतरंग शक्ति का संचालन करने वाले  संचालित योगी महा योग दर्शन है जिसका महा तेज शक्ति का प्रताप है जिसमें वह श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी भक्तजनों के जीवन का परम आधार है दया करो कृपा करो हे भक्तवत्सल तुम्हारी ही  शरण में हूँ शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

११०) हे आतंरिक योग के परम दृष्टि के दृष्टिवान  परम त्याग के परम त्यागी चरण के शक्ति का पूर्ण योग है जिसका सर्व  भूमण्डल में संचालन है जिसका वही जीवन की परम आश्रय के पूर्ण दाता है दया करो दया करो दया करो।

 

१११) हे ध्यान योग के आतंरिक दृष्टा प्रेम भाव के प्रेमानंद सर्व भाव अंतर्ज्ञानी प्रेम भाव के भावुक दाता तुम्हारे ही चरण कमलों का चरणाश्रित भाव जो है श्री श्री देवरहा हंस  बाबा जी उसको नित्य निरंतर प्राप्त करूँ।

 

११२) हे प्रेम भाव के प्रेमानंद आतंरिक शक्ति के आतंरिक योग दृष्टा पूर्ण भाव की दिव्य दृष्टि है जिनकी पूर्ण  परम दृष्टा श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी के आतंरिक योग की दृष्टि का ज्ञान प्रदान करो ज्ञान प्रदान करो ज्ञान प्रदान करो।

 

११३) हे परम ज्ञान के महा धुरंधर आतंरिक शक्ति के शक्ति दाता पूर्ण भाव के परम विधाता सर्व दर्शन का आतंरिक सर्व भाव का आतंरिक दर्शन वह श्री देवरहा हंस  बाबा जी जीवन के परम आधार हैं भक्त जनों के आतंरिक प्रेम की पिपासा पूर्ण करो हे प्रेमवतारी पूर्ण करो।

 

११४) हे ज्ञान ध्यान के पूर्ण प्रकांड अंतरंग शक्ति  प्राप्त किये हुए जो श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरणों का यशगान गुणगान ही करता रहूं।  हे कृपानिधान कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

 

११५) आतंरिक योग के परम दृष्टा सर्व दृष्टि के परम दृष्टिवान श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरण कमलों के चरणाश्रित भाव के पूर्णाश्रित भाव को प्राप्त करता रहूं।

 

११६) हे महाभाव के पूर्ण भावनात्मक स्वरुप ज्ञान दृष्टि के परम ज्ञानेश्वर आतंरिक शक्ति के पूर्ण शक्ति दृष्टा श्री श्री देवरहा हंस  बाबा जी के शरण में नित्य निरंतर प्राप्त करता रहूं रक्षा करो रक्षा करो हे कृपानिधान रक्षा करो रक्षा करो।

 

११७) हे अंतरंग योग के  परम दृष्टा अंतरंग शक्ति के महा शक्ति दाता परम दिव्य ज्योति के परम ज्योतिर्मान ज्ञान ध्यान की परम अवस्था को प्राप्त किये हुए हे श्रीश्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा का गुणगान तुम्हारी यश और कीर्ति चहुँ दिशा में फैलती रहे।

 

११८)  हे योग दर्शन के महायोगी ज्ञान ध्यान को चरम सीमा पर  पहुंचाने वाले परम शक्तिमान हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की वंदना नित्य निरंतर अहर्निश भाव से  करता रहूं कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

 

११९) हे प्राण योग के प्राणेश्वर ज्ञान भक्ति के परम भक्ति के भक्तेष्वर तुम्हारे चरणों का चरणीय आनंद जीवन का परम आधार है हे श्री श्री देवरहा हंस  तुम्ही तो जीवन के परम आश्रय हो कृपानिधान कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

 

१२०) हे अंतरंग शक्ति के आतंरिक योग दाता परम भाव परम भक्ति के परम योग दाता सर्व निष्ठ योग के महा अवतारित चरण कमलों के शरण की भक्ति को प्रदान करने वाले श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी अहर्निश भाव कृपा प्राप्त करूँ जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी।

 

१२१) हे परम शक्ति परम योग परम ज्ञान के परम ज्ञानी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे नाम की महिमा का यशगान तुम्हारे चरण कमलों में दिव्य भाव  गाता रहूं गाता रहूं गाता रहूं।

 

१२२) हे त्याग तपस्या के  आतंरिक भाव के प्रेम के पूर्ण भाव के आतंरिक प्रेमी योगमय है जो  जीवन जिनका वही जीवन के परम आधार है श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी कृपा करो  कृपा करो कृपा करो।

 

१२३) हे महा शक्ति के प्रेम विधाता अंतर भाव के आतंरिक भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान कराने  वाले आतंरिक भाव की पूर्ण अवस्था को प्राप्त कराने वाले अंतरंग ज्ञान के प्रत्यक्ष दाता सर्व योग के परम विधाता हैं जो श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे यश का गुणगान करूँ वही है जीवन के परम आधार परम आधार परम आधार।

 

१२४)  हे ज्ञान योग के परम दिव्य योगी परम दर्शन परम शक्ति के महा योगवेत्ता सर्व भाव की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले अंतर ज्ञान के अंतर्ज्ञा हे श्री श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे श्री चरण कमलों में बारम्बार कोटि कोटि प्रणाम है रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

१२५) हे भावनानंदों प्रेमानंदों ज्ञानानंदों सर्वानन्दों प्रेम भक्ति के प्रेम भाव के जागृत दृष्टा सर्व ज्ञान के  पूर्ण भाव के दृष्टि को प्रत्यक्ष करने वाले श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो, तुम्ही जीवन के परम लक्ष्य हो।

 

१२६) हे परम दया दयावान करूणानिधि करुणासागर प्रेम ज्ञान की भक्तिमय अवस्था को प्राप्त कराने वाले हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही चरणों का आश्रय जीवन का पूर्ण समर्पण है रक्षा करो रक्षा करो  हे भक्तवत्सल रक्षा करो।

 

१२७)  पूर्ण आनंद के महा आनंद स्वरुप पूर्ण शक्ति के पूर्ण शक्तिमान हे परम दयालु, परम कृपानिधान  भक्तवत्सल शरणवात्सल हे श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे ही’शरण के शरणागत हूँ। शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

१२८) आतंरिक योग दर्शन के पूर्ण दृष्टा प्रेम भाव के प्रेमावतारी ज्ञान योग के ज्ञानावतारी सर्व दर्शन की सर्व दृष्टि  है जिनकी सर्व ज्ञान के सर्व ज्ञानी, हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी आप के चरणों में कोटि कोटि वंदन करता हूँ। चरणों का चरणीय वंदन भाव स्वीकार करो स्वीकार करो स्वीकार करो।

 

१२९) हे  अंतर्भाव की पूर्ण अवस्था की दिव्य दृष्टि को प्रदान करने वाले आतंरिक  भाव की दिव्य शक्ति को देने वाले अंतरंग भाव की दिव्य दृष्टि के जो हैं दृष्टा वह श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी जीवन के परम आधार हैं। रक्षा करो रक्षा करो शरणागत की रक्षा करो। हे कृपालु शरणागत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो

 

१३०) अंतरंग योग शक्ति का आतंरिक दर्शन के  दिव्य अंतरंग योग अनुभव है जिसका वह श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी मेरी  रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

८३१) सर्वानंद की दिव्य दृष्टि के पूर्ण योग के आतंरिक दृष्टा अंतरंग अनुभूति के अंतरंग भाव के पूर्ण दृष्टि के  दृष्टा संप्रेम की पूर्ण अवस्था है जिसकी वही श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारी सदा सदा जय हो जय हो जय हो।

 

१३२)  हे सर्व योग प्रेम योग भक्ति योग ज्ञान योग के परम योग दृष्टि के महा दृष्टा सर्व भाव की अनुभूति को प्राप्त कराने वाले परम तेज शक्ति  के उद्यम अवस्था के द्वारा तुम्हारी दिव्य तेजमय शक्ति सर्व भूमण्डल में तेजावस्था फैले , हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्ही तो जीवन के परम आधार हो  रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

१३३) हे परम दृष्टि परम ज्ञान परम योग के परम ज्ञानी ध्यान दर्शन प्रेम दर्शन ज्ञान दर्शन भक्ति दर्शन के महा दर्शक महा शक्ति के तेजस्व प्रभाव के सर्व भूमण्डल में तुम्हारे यशगान का गुंजन सर्व गुंजायमान हो।

 

१३४) हे आतंरिक योग के दर्शन के दिव्य दृष्टि के दाता प्रेम भाव की परम भक्ति के प्रेम विधाता चरण कमलों की चरणाधीन भावना को जगाने वाले हे परम ज्ञानी श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे प्रकांड ज्ञान की प्रख्याति सर्व भूमण्डल में प्रसारित हो।

 

१३५) हे आतंरिक योग के दृष्टि के पूर्ण दृष्टा परम तेज के परम तपस्वी ज्ञान ध्यान के परम ध्यानी आतंरिक ज्योति के जीतिर्मय स्वरुप हे श्री  जी तुम्ही तो आतंरिक ज्योति के ज्योतिर्मय स्वरुप हो। अतः तुम्हारे श्री चरण कमलों के चरणीय भक्ति चरणीय ज्योति जीवन का परम आधार है।

 

१३६) हे  प्रेम भाव की भावना का आतंरिक जागतित कराने वाले प्रेम शक्ति के प्रेमानंद स्वरुप श्री श्री  देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे चरण कमलों की भक्ति का यशगान चहुँ दिशा में फैलता रहे। जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी।

 

१३७) हे परम ध्यान के  योगेश्वर परम योगेश्वर परम शक्ति के भक्तिमय स्वरुप प्रेमानंद दाता श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी तुम्हारे  चरण के वंदनीय गुणगान को। कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

 

१३८) हे परम योग के परम ज्ञानी महा त्याग के महा त्यागी अन्यरंग शक्ति के परम योग दृष्टा परम ज्ञान के महा ज्ञानी ज्ञान धुरंधर प्रेम भाव की पूर्ण विहत्ता को प्रदान करने वाले श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणागत वत्सल रक्षा करो।

 

१३९) अंतरंग योग दृष्टि के  दृष्टा दिव्य प्रेम भाव दृष्टि  दृष्टा भक्ति दर्शन भाव के पूर्ण भावुक दाता दिव्य दृष्टि के शरणागत तुम्हारी ही शरण में शरणगत हैं। हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी शरणगत की रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो।

 

८४०) प्रेम की अंतरंग अवस्था की दिव्य अनुभूति के आतंरिक योग के प्रेमानंद स्वरुप सर्व ज्ञान  के अंतरंग योग पूर्ण अनुभूति प्राप्त किये हुए आतंरिक योग की शक्ति के पूर्ण दाता हे श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी  तुम्हारे मान की महिमा अपरम्पार है। हे परम दीन दयालु दया करो दया करो दया करो।

 

१४१) हे आंतरिक  योग की दृष्टि के  परम दृष्टा सर्व शक्ति के पूर्ण शक्ति दाता आतंरिक योग के दर्शन के दृष्टि के पूर्ण अवस्था को प्राप्त किये हुए परम योग आतंरिक भाव के परम दृष्टा श्री श्री देवरहा हंस बाबा जी के चरण कमलों का पूर्ण वंदन करूँ।कृपा करो कृपा करो कृपा करो।

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